
4 साल बाद,
रघुवंशी महल को फूलों से सजाया गया था । आखिर आज राजशेखर रघुवंशी जी का छोटा पोता अमेरिका से अपनी स्कूलिंग कंप्लीट करके वापस आ रहा था । इन चार साल में वो न तो किसी से मिला था और न ही घर आया था । परिवार के सभी लोग तैयारियों में बिजी थे । प्रियंका जी के पैर जमीन पर टिक ही नहीं रहे थे उनके चेहरे की चमक बता रही थी कि आज वो कितना खुश है । आखिर वो आज पूरे 4 साल बाद अपने बेटे को अपने सामने देखेंगी ।
प्रियंका जी इस वक्त हॉल में थी और हर एक डेकोरेशन खुद चेक कर रही थी । तभी उन्होंने घर की हेड विमला से कहा,
" विमला तुमने आरती की थाल तैयार कर दी है ? "
उनकी बात सुन विमला ने कहा, " जी मैम, जैसा आपने कहा था मैने वैसे ही किया है । रोली की जगह चंदन रखा है क्योंकि उन्हें रोली से एलर्जी है । "
प्रियंका स्माइल करते हुए बोली, " गुड, अब जाकर किचेन में देखो कि सब तैयार है कि नहीं क्योंकि निष्कर्ष अभी आता होगा । और मुझे बिल्कुल भी कमी नहीं चाहिए । "
विमला उनकी बात सुन कर वहां से चली गई और प्रियंका जी बाकी का काम देखने लगी कि तभी उन्हें अपनी कमर में किसी के हाथ महसूस हुए । वो तुरंत हाथ हटाते हुए बोली,
" आदर्श, ये क्या कर रहे हो । कोई देख लेगा । "
लेकिन आदर्श जी अपने हाथो की पकड़ मजबूत करते हुए बोले, " अरे तो देखने दीजिए न, मैं तो अपनी बीवी से प्यार कर रहा हूं किसी पड़ोसी की बीवी से थोड़ी । "
प्रियंका जी आगे कुछ बोलती कि तभी उन्हें खांसने की आवाज सुनाई दी । आदर्श जी प्रियंका से अलग हुए दोनों ने पीछे देखा तो दादा जी और दादी जी खड़े थे ।
दादी जी बोली, " आदर्श बेटा कुछ तो शर्म कर, एक बेटे का बाप हो गया है । अब ये रोमांस वगैरा कमरे के अंदर किया कर । ऐसे खुले आम करना अच्छा नहीं लगता । "
वहीं दादी जी की बात सुन प्रियंका जी के गाल शर्म से लाल हो गए और उन्होंने एक नजर आदर्श जी को देखा फिर वो काम का बहाना बना कर चली गई उनके जाते ही आदर्श जी ने कहा,
" क्या मां आप भी न । ये सब बोलना जरूरी था क्या ? बेचारी शर्मा गई और देखा आपने कैसे घूर कर गई है अब तो मुझे रात में कमरे में भी घुसने नहीं देगी । "
सबसे पहले कहानी के कैरेक्टर से मिलेंगे तभी ये कहानी आपको समझ में आएगी । बाकी इस कहानी में काफी एज डिफरेंस है तो आप सब समझने की कोशिश करिएगा । बाकी कहानी में आपको खुद पता चल जाएगा
दादा जी _ राजशेखर रघुवंशी ( 63 साल )
दादी जी _ चंद्रिका रघुवंशी ( 61साल )
इनके दो बेटे और 1 बेटी है ।
विवेक रघुवंशी 43 ( कार्डियोलॉजिस्ट ) और उनकी पत्नी सिया रघुवंशी 40 ( संगम NGO की owner ) उनके दो बच्चे है ।
नियम रघुवंशी 21 ( MBBS kar rha hai ), दिव्या रघुवंशी 17 ( 11 ग्रेड स्टूडेंट )
आदर्श रघुवंशी 39 ( सीईओ ऑफ r r enterprises ) + प्रियंका रघुवंशी 37 ( ज्वेलरी डिजाइनर इनकी खुद की कंपनी है कोहिनूर । इनका एक बेटा है
निष्कर्ष रघुवंशी 18 ( कहानी का मेन लीड , अभी 12 पास किया है इस वक्त अमेरिका में है )
Rose raghuvanshi 28 ( मेन फीमेल लीड । सीईओ ऑफ RR फैशन इंडस्ट्री की । जो रोज ने खुद अपने दम पर बनाई है । )
बाकी के लोगों से आप कहानी में ही मिलेंगे । और यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है तो प्लीज आप इस रियल लाइफ से मत ऐड करेगा । तो शुरू करते है कहानी,
वहीं आदर्श जी की बात पर विवेक जी बोले,
" तो क्या हुआ अभी तुम्हारा भाई जिंदा है तुम्हे कंपनी देने के लिए । "
उनकी बात पर सब मुस्कुरा दिए तभी दादी जी बोली,
" वो सब तो ठीक है लेकिन ये आज सुबह से मुझे रोज कहीं नहीं दिख रही ? कहा चली गई ये लड़की । ? एक तो इसका कुछ ठिकाना नहीं । दो दो दिनों तक घर नहीं आती पता नहीं कितना काम करती है । "
उनकी बात पर आदर्श जी ने कहा,
" और कहा जाएगी मा, ऑफिस ही गई है । आज उसकी मीटिंग है न फॉरेन इन्वेस्टर्स के साथ । "
दादी जी _ " जब देखो तब काम । न सेहत का ध्यान रखना है न ही अपनी जिंदगी । उम्र निकली जा रही है लेकिन अभी तक शादी नहीं हुई । "
फिर अपने पति राजवर्धन जी और दोनों बेटों की तरफ देखते हुए बोली,
" ये सब तुम लोगों के प्यार और छूट का नतीजा है । और बिठाओ सर पर । "
तभी सिया जी अपने हाथों में चाय की ट्रे लेकर आई और दादी जी से बोली,
" मां आप क्यों परेशान होती है । वैसे भी हमारी रोज को किस चीज की कमी है । अगर उसे शादी नहीं करनी है तो हम उसे फोर्स नहीं कर सकते है । "
सिया जी की तरफदारी सुन दादी जी चाय का कप लेते हुए बोली,
" अभी ये तीन कम थे जो एक और आ गई उसका गुणगान करने । अरे यहां तो केवल हम ही गलत है बाकी सबको तो वो नालायक लड़की ही सही लगती है । "
उनकी बात पर वहां पर बैठे सभी लोग ने अपना सर न में हिला दिया क्योंकि ये उनका रोज का था । तभी राजवर्धन जी ने कहा,
" अब चुप भी करो भाग्यवान । उसके सामने तो कुछ नहीं बोलती हो । इतना तो डरती हो । और पीठ पीछे उसकी बुराई करती हो । "
दादी जी _ " मै मां हूं उसकी । मैं नहीं डरती । "
दादा जी _ " अगर नहीं डरती तो आज ही उसके सामने बोल देना । अगर नहीं बोल पाई तो मैं फिर आज सिया बहु के हाथो का बना गाजर का हलवा खाऊंगा वो भी दो कटोरी । " ।
उन दोनों की बातें और शर्त सुन कर आदर्श जी , विवेक जी , और सिया जी तीनों मुस्कुरा उठी । की तभी बाहर से एक बॉडीगार्ड दौड़ते हुए आया और बोला,,
" मैम, छोटे साहेब आ गए । "
ये सुनते हु सब लोग तुरंत दरवाजे की तरफ जाते है और प्रियंका जी अपने हाथों में आरती का थाल लिए दरवाजे की तरफ अपने कदम बढ़ा देती है ।





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