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हमने आपकी शादी तय कर दी है

"जिसे हम सबसे ज्यादा नफरत करते हैं, कभी-कभी क़िस्मत हमें उसी से जोड़ देती है..."

📍 सूर्यवंशी हवेली, राजस्थान – रात 01:30 बजे 

चांदनी रात थी, लेकिन आसमान काले घने बादलों से ढका हुआ था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी, जो सूखे पत्तों को ज़मीन पर इधर-उधर बिखेर रही थी। हवेली के बाहर पुराने आम और अशोक के पेड़ अपनी छायाएं फर्श पर फैला रहे थे, जिससे माहौल और रहस्यमय लग रहा था । हवेली के चारों तरफ ब्ल्यू कलर के यूनिफॉर्म पहने हुए दर्जनों की संख्या में गार्ड खड़े हुए थे ।

सफेद संगमरमर से बनी ये हवेली रात की चांदनी ने चमक रही थी । हवेली के अंदर संगमरमर के फर्श पर नक्काशीदार गलीचों की परत थी, ऊँची छत पर झूमर लटका था, जिसकी रोशनी दीवारों पर सुनहरी चमक बिखेर रही थी। भारी-भरकम लकड़ी के फर्नीचर और दीवारों पर लगी पुरानी तस्वीरें । महंगे और यूनिक सो पीस । इस बात का एहसास करा रही थीं कि यह हवेली सालों से सूर्यवंशी परिवार की विरासत रही है। और यहां रखी हर चीज की कीमत करोड़ों में थी ।

हवेली के बड़े से हॉल में परिवार के सभी लोग बैठे हुए थे । उन सभी के चेहरे पर परेशानी थी ।

तभी बाहर किसी गाड़ी के रुकने की आवाज़ आई । और सबकी नजर दरवाजे पर टिक गई । एक 23 साल की लड़की जिसने , हल्के ग्रे रंग की फॉर्मल ड्रेस पहनी हुई थी, कंधे से थोड़ा नीचे स्ट्रेट बाल, गोरा रंग, चेहरे पर थकावट होने के बावजूद भी अलग से कॉन्फिडेंस और एक चमक थी । वह अपने फोन में ईमेल चेक करते हुए अंदर आई कि तभी उसकी नजर हाल में बैठे सभी लोगों पर गई । उसे एहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ है। 

तभी उसके पापा ( वीरेंद्र जी ) ने पूछा , " आज काफी देर हो गई बेटा । "

उनकी बात सुन कर उस लड़की ने एक गहरी सांस ली और बोली,

" जी बाबा सा, फॉरेन क्लाइंट के साथ मीटिंग थी । " फिर सबकी तरफ देखते हुए बोली,

" वैसे आप लोग अभी तक जाग रहे हैं । कोई खास बात ? "

उसकी बात सुनकर उसकी मां ( संध्या जी ) ने कहा, " हमें आपसे कुछ बात करनी है रिधिमा "

रिधिमा _ जी कहिए ।

इतना बोल कर रिधिमा ने अपना मोबाइल पॉकेट में रखा और अपनी मां को देखने लगी । वहीं संध्या जी कहीं अपने बगल में बैठे वीरेंद्र जी को देखती तो कहीं सामने बैठी अपनी सास ( यशवंती जी ) को । उनके मन में घबराहट थी क्योंकि वो जो कहने वाली थी उससे रिद्धिमा के गुस्से का ठिकाना नहीं था ।

दो मिनट तक कुछ न बोलने पर रिद्धिमा ने गहरी सांस ली और सीढ़ियों की तरफ जाते हुए बोली,

" ठीक है अगर आप लोगों कुछ नहीं बोलना है तो मैं जा रहीं हु । वैसे भी रात काफी हो गई है आप लोगों को भी सो जाना चाहिए । "

इतना बोलकर वह सीढ़ियां चढ़ते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि अचानक उसके कदम रुक गए ।

" हमने आपकी शादी तय कर दी है राजकुमारी रिद्धिमा  सूर्यवंशी  "

रिधिमा को एक पल के लिए अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ वह तुरंत पीछे मुड़ी और अपनी दादी सा की तरफ देखने लगी,

" आपने क्या कहा दादी सा .। " उसने दोबारा कंफर्म करने के लिए पूछा ।

यशवंती जी बोली, " यही कि हमने आपकी शादी तय कर दी है । और 15 दिन बाद आपकी शादी है । "

लेकिन रिद्धिमा ने बेफिक्र अंदाज में कहा,

" तो तोड़ दीजिए शादी , क्योंकि मुझे जरा सा भी इंटरेस्ट नहीं है । "

तभी संध्या जी बोली, " रिद्धि बेटा आप कैसी बात कर रही हैं । शादी कोई मजाक नहीं कि उसे तोड़ दिया जाए और जब मन किया जोड़ा जाए । यह एक पवित्र बंधन है जिसमें न सिर्फ एक लड़का और लड़की और ना  ही उसका परिवार बल्कि दो आत्माओं का मिलन होता है । "

वह आगे कुछ बोलती उससे पहले ही रिद्धिमा बोली, " मां सा प्लीज, मैंने आप सब से पहले ही कहा है कि मुझे शादी प्यार जैसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है और ना ही मुझे शादी करना है । मेरे पास सब कुछ है दौलत शोहरत बिजनेस नाम सब कुछ, तो फिर मुझे किसी पार्टनर की जरूरत नहीं है । "

" लेकिन बेटा, " वीरेंद्र जी रिद्धिमा को कुछ कहते हैं उससे पहले ही यशवंती जी ने कहा,

" रिद्धिमा, हम सब जानते हैं कि  अतीत में जो कुछ भी हुआ है उसकी वजह से आपका शादी पर से विश्वास उठ गया है लेकिन जरूरी तो नहीं की हर लड़का उसके जैसा ही हो । हमें जिंदगी को एक और मौका देना चाहिए और मैंने जो लड़का आपके लिए चुना है वह आपका जिंदगी भर साथ निभाएगा । "

दादी जी की बात को आगे बढ़ते हुए वीरेंद्र जी रिद्धिमा से बोले,

" मां सा बिल्कुल ठीक कह रही है बेटा, वो हर एक तरह से आपके काबिल है । मुझे पूरा यकीन है कि आप उसके साथ खुश रहेगी । "

अपने बाबा सा और दादी सा का कॉन्फिडेंस देख कर रिद्धिमा को शक हुआ । वो बोली,

" कौन है वो लड़का । "

यशवंती जी मुस्कुराते हुए बोली,

" मेरी सहेली राधिका का पोता । मृत्युंजय राजवंश "

उनकी बात सुनते ही रिद्धिमा के पैरों तले जमीन के सकते हैं उसकी काली आंखें गुस्से से लाल हो चुकी थी । वो गुस्से से उनकी तरफ आई और बोली,

" क्या ? "

" आप उस मृत्युंजय राजवंश की बात कर रही है । " रिद्धिमा ने कंफर्म किया । लेकिन अब उसका गुस्सा बढ़ गया था । वो बोली,

" मैं इस दुनिया में किसी भी लड़के से शादी कर लूंगी लेकिन उस मृत्युंजय राजवंश से शादी नहीं करूंगी । "

" यह कैसी बात कर रही है आप ? वो राजस्थान के होने वाले हुकुम सा है । हमने आपको यही संस्कार दिए है । " संध्या जी रिद्धिमा पर गुस्सा करते हुए बोली । लेकिन रिद्धिमा का उन पर कोई असर नहीं पड़ा ।

वह कुछ कहती है उससे पहले ही यशवंती जी ने कहा,

" यह शादी होकर रहेगी क्योंकि हमने राधिका को जुबान दे दी है । और भूलिए मत की राधिका के कितने अहसान है आपके ऊपर । "

रिद्धिमा _ " हा तो मैने नहीं कहा था उनसे की मुझे खून देकर मेरी जिंदगी बचा लो । इससे अच्छा उसी वक्त मैं मर जाती क्योंकि मेरे लिए उस मृत्युंजय राजवंश से शादी करना मौत के बराबर है । "

इतना कहते हुए रिद्धिमा ने गुस्से में टेबल में रखा हुआ फ्लावर पॉट जमीन पर पटक दिया और अपने रूम की तरफ चली गई । उसके जाते ही रिद्धिमा के बड़े भाई अर्जुन ने कहा,

" आप सब चिंता न करिए । वो थोड़ा गुस्से में है मैं देखता हूं जाकर । "

इतना बोल कर वो रिद्धिमा के पीछे पीछे चला गया । जैसे ही अर्जुन रिद्धिमा के कमरे में पहुंचा उसने देखा रिद्धिमा बालकनी में खड़ी असमान में चांद निहार रही थी उसकी आंखे गुस्से से लाल थी ।

" इतना गुस्सा क्यों करती हो रिद्धि, " अपने भाई सा की आवाज सुन रिद्धिमा बोली,

" मुझे अभी कोई बात नहीं करनी है आप यहां से चले जाइए । "

तभी अर्जुन ने उसके दोनों कंधों को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और उसके चेहरे को अपने हाथो में भरते हुए प्यार से बोला,

" मेरी प्यारी सी गुड़िया, गुस्से में और ज्यादा क्यूट लगती है । "

" भाई सा प्लीज, मुझे पता है आप यहां मुझे मनाने आए है लेकिन आप जानते है न कि वो इंसान मुझे बिल्कुल नहीं पसंद । "

" रिद्धि, दादी सा ने रिश्ता तय कर दिया है और मृत्युंजय बहुत अच्छा लड़का है वो दिल का बुरा नहीं है " अपने भाई सा की बात सुनते ही रिद्धिमा ने उनका हाथ हटाया और बोली,

" आप फिर अपने दोस्त की तरफदारी करने आ गए । रहने दीजिए भाई सा मुझे इस वक्त अकेले रहना है आप प्लीज चले जाइए । "

अर्जुन ने एक गहरी सांस ली और बोला,

" ठीक है मैं जा रहा हूं लेकिन एक बार इस पर जरूर सोचना । बाकी जैसी आपकी मर्जी , बाबा सा और दादी सा ने उन्हें वादा किया है अब ये आपके ऊपर है कि आप अपने बाबा सा और दादी सा का मान रखती है या फिर अपने गुस्से में आकर उनका अपमान करेगी । "

इतना बोल कर अर्जुन वहां से चला जाता है और रिद्धिमा गुस्से से अपनी आंखें बंद कर लेती है । ।

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avi Pandey

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