रिद्धिमा सुबह जल्द ही ऑफिस के लिए निकल आई थी क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि सुबह सुबह उसके घरवाले उसे शादी के विषय में बात करे वो इस बारे में सोच विचार कर फैसला लेना चाहती थी क्योंकि एक तरफ उसकी फैमिली उसके बाबा सा की इज्जत तो दूसरी तरफ मृत्युंजय से नफरत ।
इस वक्त वो अपने ऑफिस के ग्लास विंडो के पास खड़ी होकर सोच रही थी तभी दरवाजे पर नाक हुआ ।
" कम इन " रिद्धिमा ने कहा ।
उसके परमिशन देते ही उसका अस्सिटेंट रोहित अंदर आया और बोला,
" मैम आपसे मिलने मिस्टर राजवंश आए है । " ।
रिद्धिमा ने कुछ सोचते हुए कहा, " उन्हें अंदर भेजो । और याद रहे कोई डिस्टर्ब न करे । "
रोहित हा बोलकर वहां से चला गया और दो मिनट बाद एक शक्श जिसकी उम्र लगभग 28 साल होगी , रिद्धिमा के केबिन में आया ।
वो जैसे ही अंदर रिद्धिमा की नजरे उन पर टिक गई । उस शक्श ने ब्लैक कलर का बिजनेस सूट पहना हुआ था जो उसकी मस्कुलर बॉडी में बहुत अट्रैक्टिव लग रहा था उसकी ग्रीन हाजेल आइज बिना किसी इमोशंस के रिद्धिमा को देख रही थी ।
उसकी आंखों में एक ऐसी कशिश थी जिसे चाह कर के भी रिद्धिमा दूर नहीं हो पाती थी । वो शक्श अंदर आया और उसने अंदर से दरवाजा लॉक किया ।
तभी रिद्धिम बोली,
" ये आप क्या कर रहे हैं मिस्टर राजवंश । डोर क्यों लॉक कर रहे है ? "
उसकी बात सुनकर मिस्टर राजवंश रिद्धिमा की तरफ मुड़े और बोले,
" क्योंकि मैं नहीं चाहता कि हम दोनों की बात कोई तीसरा जाकर सुने । "
उसकी बात पर रिद्धिमा बोली, " मेरा केबिन साउंड प्रूफ है तो आप इस चीज के लिए बेफिक्र कर रहे हैं । वैसे आप यहां क्या करने आए हैं ? "
रिद्धिमा की बात सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गए वह सोफे पर बैठते हुए बोला,
" लगता है तुम्हें मेरा यहां आना अच्छा नहीं लगा । "
" बिल्कुल ठीक कहा आपने अभी तक मेरा मूड बहुत अच्छा था लेकिन जैसे ही मैं आपकी शक्ल देख ली अब मेरा पूरा दिन खराब जाने वाला है । " इतना बोलते हुए रिद्धिमा उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गई ।
" पर अब तुम्हें पूरी जिंदगी मेरी यही शक्ल देखकर काम चलाना होगा । " रिद्धिमा ने जैसे ही उसकी यह बात सुनी वह गुस्से में बोली,
" देखो मिस्टर, तुम अपने घर वालों को मना कर दो क्योंकि मैं यह शादी नहीं करना चाहती हूं । मैं तुमसे सिर्फ और सिर्फ नफरत करती हूं समझ में आया मिस्टर मृत्युंजय सिंह राजवंश । "
रिद्धिमा की बात सुन मृत्युंजय को कुछ खास फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उसे पता था कि उसके और रिद्धिमा के बीच में जिस तरह के रिश्ते थे उसमें उसका नफरत करना लाजमी था ।
"मैं इस शादी के लिए नहीं मना कर सकता । "
" Why... " उसके बाद सुनकर रिद्धिमा ने तेज आवाज में पूछा उससे पहले वह आगे कुछ कहती कि मृत्युंजय बोला,
" मिस रिद्धिमा सूर्यवंशी अगर आपको शादी से इतनी दिक्कत है तो आप खुद क्यों नहीं मना कर देता वैसे भी आप तो मुझसे नफरत करती है ना । "
रिद्धिमा _ " मैं नहीं मना कर सकती क्योंकि मेरे बाबा साहब और दादी सा ने आपकी मा सा को वादा दिया है । "
मृत्युंजय _ " और मेरी मां सा ने मुझे अपनी कसम दी है इसलिए मैं यहां पर आपको एक ऑफर देने आया था । "
उसके बाद सुनकर रिद्धिमा शक भरी नजरों से उसे देखने लगी, " कैसा ऑफर "
मृत्युंजय के चेहरे पर स्माइल थी और वह एक फाइल रिद्धिमा की तरफ आगे करते हुए बोला,
" यह कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स है तुम पढ़ कर इसमें साइन कर सकती हो । "
रिद्धिमा ने मृत्युंजय के हाथ से कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स लिए और उनमें लिखी शर्तें पढ़ने लगे जैसे ही जैसे वह पढ़ रही थी उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस बिगड़ रहे थे । पूरी फाइल रीड करने के बाद उसने गुस्से भरी नजरों से मृत्युंजय को देखा और कहा,
" मैं अभी तक सिर्फ सोचती थी कि तुम्हें बहुत बदतमीज किस्म के इंसान है लेकिन आज तुमने साबित कर दिया । मैं इन पेपर्स पर कभी साइन नहीं करूंगी और ना ही तुमसे कोई शादी करूंगी । "
इतना बोलकर उसने वह फाइल मृत्युंजय के सामने टेबल पर पटक दी की तभी उसका फोन रिंग हुआ उसने कॉलर आईडी देखी तो अर्जुन का फोन था उसने तुरंत फोन उठाया दूसरी तरफ से अर्जुन ने कहा,
" रिद्धिमा तुम प्लीज जल्दी से सिटी हॉस्पिटल आ जाओ "
" क्या हुआ भाई सा , आप ठीक तो हैं "
" मैं बिल्कुल ठीक हूं लेकिन बाबा सा,.. "
अर्जुन आगे कुछ बोलता उससे पहले ही रिद्धिमा घबराते हुए बोली,
" क्या हुआ बाबा को ? बताइए ना भाई सा क्या हुआ बाबा को ? "
रिद्धिमा बहुत ज्यादा घबरा रही थी लेकिन अर्जुन उसे पूरी बात न बताकर सिर्फ इतना ही बोलता है,
" यह वक्त बात करने का नहीं है तुम बस हॉस्पिटल आ जाओ । " अर्जुन ने फोन कट कर दिया और रिद्धिमा जल्दी से दरवाजे की तरफ मुड़ी किताबें मृत्युंजय ने उसे रोकते हुए कहा,
" क्या हुआ तुम ठीक हो ? किसका फोन था ? "
रिद्धिमा बहुत घबराई हुई थी उसने बस इतना कहा, " भाई सा का कॉल था । मुझे सिटी हॉस्पिटल बुलाया वह बाबा सा... " इसके आगे वह कुछ कहीं नहीं पा रही थी ।
मृत्युंजय ने उसे शांत करते हुए कहा,
" तुम प्लीज थोड़ा रिलैक्स करो मैं तुम्हें हॉस्पिटल लेकर चलता हूं । पर प्लीज इस तरह घबराना बंद करो । "
दूसरी तरफ सिटी हॉस्पिटल में...
इमर्जनेजी रूम में...
वीरेंद्र जी हॉस्पिटल बेड पर लेटे हुए थे उनके चेहरे पर बड़ा सा मास्क लगा हुआ था और आसपास डॉक्टर्स और नर्स मौजूद थी जो उनका चेकअप कर रही थी ।
रूम के बाहर पूरा सूर्यवंशी परिवार खड़ा था संध्या जी का रो-रो कर बुरा हाल था यशवंती जी संध्या जी को संभाल रही थी और अर्जुन दरवाजे पर लगे हुए कांच के शीशे से अंदर वीरेंद्र जी को देख रहा था ।
थोड़ी देर में रिद्धिमा मृत्युंजय के साथ वहां पर पहुंचती है आते ही सबसे पहले उसने अर्जुन से कहा,
" भाई सा क्या हुआ है बाबा को "
उसके पूछने पर अर्जुन बोला,
" बाबा गार्डन में टहल रहे थे अचानक बेहोश हो गए । अभी तक उन्हें होश नहीं आया डॉक्टर अपना ट्रीटमेंट कर रहे हैं "
जैसे ही रिद्धिमान ने सुना वह बहुत ज्यादा घबरा गई उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे तभी डॉक्टर बाहर निकले तो रिद्धिमा ने तुरंत उनसे पूछा,
" डॉक्टर मेरे बाबा को क्या हुआ है वह ठीक है ना "
डॉक्टर ने अपना मास्क उतारा और कहा,
" देखिए उन्हें हार्ट अटैक आया है । ऐसा लगता है कि वह पिछले कुछ दिनों से काफी स्ट्रेस में थे । उनकी कंडीशन पहले से स्टेबल है कुछ घंटे में उन्हें होश आ जाएगा पर आप सब इतना ध्यान रखिए कि उन्हें किसी भी तरह का स्ट्रेस मत दें । "
इतना बोलकर डॉक्टर ने अर्जुन से कहा,
" श्री सूर्यवंशी आप मेरे केबिन में लिए मुझे आपसे कुछ बात करनी है । "
उनकी बात सुनकर अर्जुन उनके पीछे-पीछे चला गया और रिद्धिमा अपनी मां को गले लगा कर उन्हें शांत कराते हुए बोली,
" मां सा आप शांत हो जाइए बाबा को कुछ नहीं हुआ है । उन्हें अभी नार्मल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा । "
मृत्युंजय की नजरे रिद्धिमा पर थी उसने अपना फोन
निकाला और कुछ टाइप करके फिर वापस अपने पॉकेट में डाल लिया ।
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